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Tuesday, March 19, 2019

कौन होते हैं अघोरी, क्या अंतर है नागा साधु और अघोरी में

हिंदू धर्म में कई प्रकार के साधु होते हैं और इनमें से एक हैं नागा साधु और अघोरी बाबा। देखने में इनकी वेशभूषा एक जैसी लगती है। मगर इनके साधु बनने की प्रक्रिया और रहन-सहन और तप-साधना में काफी अंतर होता है। नागा साधु कुंभ में बढ़-चढ़कर हिस्‍सा लेते हैं, लेकिन अघोरी बाबा कुंभ में नहीं जाते। आइए जानते हैं नागा और अघोरी में होते हैं कौन-कौन से मुख्‍य अंतर…

1. अघोर बनने की पहली शर्त है अपने मन से घृणा को निकालना। अघोर क्रिया व्यक्त को सहज बनाती है। मूलत: अघोरी उसे कहते हैं जो शमशान जैसी भयावह और विचित्र जगह पर भी उसी सहजता से रह सके जैसे लोग घरों में रहते हैं।
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Aghori
 2. अघोरियों के गुरु स्‍वयं भगवान शिव होते हैं। अघोरियों को भगवान शिव का ही पांचवां अवतार माना जाता है। अघोरी श्‍मशान में मुर्दे के पास बैठकर अपनी तपस्‍या करते हैं। मान्‍यता है कि ऐसा करने से उन्‍हें दैवीय शक्तियों की प्राप्ति होती है। 
Aghori

3. नागा और अघोरी बाबा के पहनावे-ओढ़ावे में भी काफी अंतर होता है। नागा साधु बिना कपड़ों के रहते हैं। जबकि अघोरी ऐसे नहीं रहते। भगवान शिव के ये सच्‍चे भक्‍त उन्‍हीं की तरह ही जानवरों की खाल से अपने तन का निचला हिस्‍सा ढकते हैं।
Aghori, naga, sadhu, aghori sadhu, nagasadhu,
Naga Sadhu

4. अघोरी शाकाहारी नहीं होते। माना जाता है कि ये न केवल जानवरों का मांस खाते हैं, बल्कि ये इंसानों के मांस का भी भक्षण करते हैं। ये श्‍मशान में मुर्दों के मांस का भक्षण करते हैं।

5. अघोर पंथ के प्रणेता भगवान शिव माने जाते हैं। कहा जाता है कि भगवान शिव ने स्वयं अघोर पंथ को प्रतिपादित किया था।

6. वाराणसी या काशी को भारत के सबसे प्रमुख अघोर स्थान के तौर पर मानते हैं। भगवान शिव की स्वयं की नगरी होने के कारण यहां विभिन्न अघोर साधकों ने तपस्या भी की है।
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Monday, June 18, 2018

इन रोचक तथ्यों की जानकारी क्या आपको पता है ?

1. आजतक इतिहास में एक भी ऐसी घटना नही हुई है कि किसी स्वस्थ भेड़िये ने इंसान पर हमला कर दिया हो।

2. धरती पर कीड़ों की उत्पती मनुष्य से पहली हुई मानी जाती है। पहले तो सभी कीड़े एक जैसे थे मगर भिन्न हालातों में रहने के कारण इन की शारीरीक संरचना में थोड़ा-थोड़ा अंन्तर आ गया और इन की कई प्रजातीयां अस्तितव में आ गई।
Types of insects - FactGyan
Insects Classification


3. मधुमक्खियाँ सिर्फ आधा किलो शहद बनाने के लिए बीस लाख फूलों का उपयोग करती है और 1 लाख किलोमीटर से भी ज्यादा यात्रा करती हैं। इतनी यात्रा धरती के ढाई चक्कर लगाने के बराबर है।


4. ग्रामीण इलाकों के एक वर्ग मील के क्षेत्र में जितने कीड़े पाए जाते हैं उनकी गिणती धरती पर मौजुद सभी मनुष्यों से ज्यादा है।
Photo of village FactGyan

5. एक बंबर मक्खी 1 सैकेड में 160 बार अपना पंख हिला सकती है।

6. 85% लोग सोने से पहले वो सब सोचते हैं जो वो अपनी जिंदगी में करना चाहते।
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Saturday, June 16, 2018

कुछ रोचक 07 Animal Facts जो आपको किताबों में नही मिलेगें

कुछ रोचक 07 Animal Facts जो आपको किताबों में नही मिलेगें
 
1. बाघ का वैज्ञानिक नाम पेंथेरा टिग्रिस है। यह भारत का राष्ट्रीय पशु भी है। बाघ शब्द संस्कृत के व्याघ्र का तदभव रूप है।



2. भारत के बाघ को एक अलग प्रजाति माना जाता है, जिसका वैज्ञानिक नाम है पेंथेरा टाइग्रिस टाइग्रिस।


3. बाघ की नौ प्रजातियों में से तीन अब विलुप्त हो चुकी हैं।

4. एक आंकड़े के अनुसार 1800 से लेकर 2009 तक बाघों ने 3,73,000 मनुष्यों की जान ली है |

5. विश्व का सबसे छोटा साँप थ्रेड स्नेक होता है। जो कैरेबियन सागर के सेट लुसिया माटिनिक तथा वारवडोस आदि द्वीपों में पाया जाता है वह केवल 10-12 सेंटीमीटर लंबा होता है।


6. कुछ प्रागैतिहासिक प्रजातियां आकार में व्यस्क मानव जितनी उंची तथा वजनी थीं (अधिक जानकारी के लिए नीचे देखें). ये प्रजाति अंटार्कटिक क्षेत्रों तक ही सीमित नहीं थी; बल्कि इसके विपरीत, अंटार्कटिक उपमहाद्वीप के क्षेत्रों में ज्यादा विविधता मिलती थी और कम से कम एक विशाल पेंगुइन उस क्षेत्र में मिला है जो भूमध्य रेखा के 35 से 2000 किमी दक्षिण से ज्यादा दूर नहीं था तथा जहां का वातावरण आज के अपेक्षाकृत ज्यादा गरम था।

7. पेंगुइन को इंसानों से कोई विशेष डर नहीं लगता है और वे बिना हिचकिचाहट के खोजकर्ताओं के समूहों के पास आते हैं। ऐसा शायद इसलिए है क्योंकि जमीन पर पेंगुइन का अंटार्कटिक या पास के अपतटीय टापुओं पर कोई शिकारी नहीं है।
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Friday, June 15, 2018

कुछ रोचक 08 Animal Facts जो आपको किताबों में नही मिलेगें

कुछ रोचक 08 Animal Facts जो आपको किताबों में नही मिलेगें

1. बंदरों को दो वर्गो में बांटा गया है – पहले प्राचीन दुनिया के बंदर जो ऐशिया और अफ्रीका में पाए जाते है और दूसरे नवीन दुनिया के बंदर जो दक्षिणी अमेरिका में पाए जाते हैं।

2. मनुष्यों के सिवाए केवल बंदर ही एकलौते ऐसे प्राणी है जो केलों के छिलके उतार कर खाते हैं।

3. 'छिपकली', रैपटाइल परिवार का सबसे बड़ा प्रजाति समूह है। छिपकली के आलावा रैपटाइल परिवार में सांप, घड़ियाल, मगरमच्छ, मेढक, और कछुआ जैसी अन्य प्रजातियाँ भी शामिल हैं।

4. छिपकली का वैज्ञानिक नाम 'लाकेर्टिलिआ' (Lacertilia) है।


5. हैरानी की बात है कि छिपकली की पूंछ कई बार उसकी सुरक्षा करती है जब भी कोई दुश्मन छिपकली को उसकी पूंछ से पकड़ता है तो छिपकली अपनी पूंछ का वह हिस्सा अपने शरीर से अलग कर देती है।

6. कोमोडो ड्रागन प्रजाति की छिपकली दुनिया की सबसे बड़ी और खतरनाक छिपकली है। यह 10 फुट लम्बी और 300 पौंड भारी होती है। ऐसा कहा जाता है कि कोमोडो ड्रागन इंसानों को भी नहीं छोड़ती है

7. दुनियाभर में छिपकलियों की 5,600 प्रजातियां हैं वैज्ञानिकों के अनुसार छिपकलियों का अस्तित्व धरती पर 200 मिलियन साल पुराना है

8. ‘कुत्ते से सावधान’ यह चेतावनी प्राचीन रोम के एक शहर के घर के दरवाजे पर लिखी पायी गयी हैं. (करीब 2761 साल पहले).

9. FIDO नाम के, अब्राहिम लिंकन के कुत्ते का भी कत्ल किया गया था.


10. ग्रीक और बुलगारिया में एक युद्ध सिर्फ इसलिए लड़ा गया था क्योंकि ग्रीक का एक कुत्ता बुलगारिया का border पार कर गया था.
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